Saturday, December 17, 2011

ऋत्विज की कविता - "सुबह"

सुबह दर्ददायक हो सकती है
एक कैदी के लिए ।

सुखदायक हो सकती है
एक रईस के लिए ।

पर , एक बच्चे के लिए ?
एक बच्चे के लिए तो
सुबह , बस सुबह होती है ।

रात को जब वह
अपने ख्वाबों को सँजोकर
पुराने कम्बल को ओढ़ता है
वह कल्पना होती है सुबह  !

रात को
अनजान देश में सफर करने के बाद
जब पिता की गम्भीर आवाज सुनकर
उठने से कतराता है बच्चा
वह आलस्य होती है सुबह !

और पूरे जगमग दिन के बाद
फिर से रात को
एक नई सुबह का इन्तजार करते हुए
जब सोता है बच्चा
वह आशा है सुबह !

-ऋत्विज कमल

(साउथ प्वाइन्ट हाई स्कूल की वार्षिक पत्रिका ASCENT 2011 में प्रकाशित ऋत्विज की कविता)

1 comment:

  1. एक छोटे बच्चे में अपार संभावनाए हैं कविता लिखने की.. उन्हें स्नेहाशीष.. और आपको बधाई..

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