Saturday, December 31, 2016

बाकी बच गया अण्डा


योगीन्द्रनाथ सरकार को रवींद्रनाथ ठाकुर ने बांग्ला शिशु-साहित्य का भगीरथ कहा है । इन्हीं योगीन्द्रनाथ सरकार की एक कविता है, हराधनेर दशटि छेले (हाराधन के दस बेटे) । कविता हाराधन के दस बेटों के बारे में है जो बारी-बारी से या तो मारे जाते हैं या कहीं चले जाते हैं और अंत में हाराधन के पास कोई बेटा नहीं बचता । कविता तुकांत है ।
हिन्दी कवि नागार्जुन शिशु साहित्यिक तो नहीं हैं लेकिन एक कविता नागार्जुन की भी है, बाकी बच गया अण्डा । यह कविता भारत माता के पाँच बेटों के बारे में है । यहाँ भी ये सब बारी-बारी से या तो मारे जाते हैं या कहीं चले जाते हैं और अंत में भारत माता के पास कोई बेटा नहीं बचता । नागार्जुन की यह कविता भी तुकांत है और उसी मीटर में है जिसमें योगीन्द्रनाथ सरकार की कविता है ।
ये कविताएँ एक ही पैटर्न की कविताएँ हैं । विषयवस्तु के स्तर पर भी और शिल्प के स्तर पर भी । इनमें रचनाकाल की दृष्टि से योगीन्द्रनाथ सरकार (जीवनकाल 1866 -1937) की कविता पहले की है और नागार्जुन की, बाकी बच गया अण्डा (रचनाकाल - 1950) उसके बहुत बाद की ।
नागार्जुन की कविता, बाकी बच गया अण्डा, योगीन्द्रनाथ सरकार की कविता, हराधनेर दशटि छेले, से "प्रेरणा" (प्रेरणा को प्रेरणा ही पढ़ा जाए) लेती हुई दिखती है ।

★★ ★★ ★★
हाराधनेर दशटि छेले / योगीन्द्रनाथ सरकार
(लिप्यान्तर)

हाराधनेर दशटि छेले
घोरे पाड़ामय
एकटि कोथाय हारिए गेलो
रोइलो बाकि नय ।

हाराधनेर नयटि छेले
काटते गेलो काठ
एकटि केटे दुखान होलो
रोइलो बाकि आट ।

हाराधनेर आटटि छेले
बोसलो खेते भात
एकटिर पेट फेटे गेलो
रोइलो बाकि सात ।

हाराधनेर सातटि छेले
गेलो जलाशय
एकटि जले डुबे मोरलो
रोइलो बाकि छय ।

हाराधनेर छयटि छेले
चड़ते गेलो गाछ
एकटि मोरलो आछाड़ खेये
रोइलो बाकि पाँच ।

हाराधनेर पाँचटि छेले
गेलो बनेर धार
एकटि गेलो बाघेर पेटे
रोइलो बाकि चार ।

हाराधनेर चारटि छेले
नाचे ता धिन धिन
एकटि गेलो पिछले पोड़े
रोइलो बाकि तिन ।

हाराधनेर तिनटि छेले
धोरते गेलो रुई
एकटि मोरलो आछड़े पोड़े
रोइलो बाकि दुई ।

हाराधनेर दुइटि छेले
धोरते गेलो भेक
एकटि गेलो सापेर विषे
रोइलो बाकि एक ।

हाराधनेर एकटि छेले
काँदे भेउ भेउ
मोनेर दुःखे बोने गेलो
रोइलो ना आर केउ ।

হারাধনের দশটি ছেলে / যোগীন্দ্রনাথ সরকার

হারাধনের দশটি ছেলে
ঘোরে পাড়াময়
একটি কোথা হারিয়ে গেলো
রইলো বাকি নয়।

হারাধনের নয়টি ছেলে
কাটতে গেলো কাঠ
একটি কেটে দুখান হলো
রইলো বাকি আট।

হারাধনের আটটি ছেলে
বসলো খেতে ভাত
একটির পেট ফেটে গেলো
রইলো বাকি সাত।

হারাধনের সাতটি ছেলে
গেলো জলাশয়
একটি জলে ডুবে মলো
রইলো বাকি ছয়।

হারাধনের ছয়টি ছেলে
চড়তে গেলো গাছ,
একটি মলো আছাড় খেয়ে
রইলো বাকি পাঁচ।

হারাধনের পাঁচটি ছেলে
গেলো বনের ধার,
একটি গেলো বাঘের পেটে
রইলো বাকি চার ।

হারাধনের চারটি ছেলে
নাচে তা ধিন ধিন
একটি গেলো পিছলে পড়ে
রইলো বাকি তিন।

হারাধনের তিনটি ছেলে
ধরতে গেলো রুই
একটি মলো আছড়ে পড়ে
রইলো বাকি দুই।

হারাধনের দুইটি ছেলে
ধরতে গেলো ভেক
একটি গেলো সাপের বিষে
রইলো বাকি এক।

হারাধনের একটি ছেলে
কাঁদে ভেউ ভেউ
মনের দুঃখে বনে গেলো
রইলো না আর কেউ।

हाराधन के दस-दस बेटे / योगीन्द्रनाथ सरकार
(हिन्दी भावानुवाद)

हाराधन के दस-दस बेटे गली मुहल्ले बीच
एक कहाँ खो गया न जाने बाकी बच गये नौ ।

हाराधन के नौ बेटे अब गये चीरने काठ
दो टुकड़े हो गये एक के बाकी बच गये आठ ।

आठ पुत्र अब हाराधन के खाने बैठे भात
पेट फट गया किसी एक का बाकी बच गये सात ।

हाराधन के सात पुत्र अब गये जलाशय में
एक बेचारा डूब मरा अब बाकी बच गये छै ।

छै बेटे अब हाराधन के चढ़े पेड़ की डाल
जख्मी हो कर एक मर गया बाकी बच गये पाँच ।

पाँच पुत्र अब हाराधन के जंगल के थे पास
बाघ खा गया किसी एक को बाकी बच गये चार ।

चार पुत्र अब हाराधन के नाचे ता ता धिन
पाँव फिसल कर एक मरा अब बाकी बच गये तीन ।

तीन पुत्र हाराधन के अब गये पकड़ने रोहू
गिर कर एक बेचारा मर गया बाकी बच गये दो ।

दो बेटे अब हाराधन के चले पकड़ने भेक*
सर्पदंश से एक मर गया बाकी बच गया एक ।

हाराधन का एक था बेटा फूट फूट कर रोय
दुःखी हुआ तो वन को भागा बाकी बचा न कोय ।
(हिन्दी भावानुवाद : नील कमल)
*भेक - मेढक

★★ ★★ ★★
बाकी बच गया अण्डा / नागार्जुन

पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार
गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार

चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन
देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन

तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो
अलग हो गया उधर एक, अब बाक़ी बच गए दो

दो बेटे भारतमाता के, छोड़ पुरानी टेक
चिपक गया है एक गद्दी से, बाक़ी बच गया एक

एक पूत भारतमाता का, कन्धे पर है झण्डा
पुलिस पकड कर जेल ले गई, बाकी बच गया अण्डा

★★ ★★ ★★

No comments:

Post a Comment